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Thursday, 3 January 2013

उम्र

उस पार एक मकान था, नदी बहती थी बीच अपने
बुढा गया था काफ़ी, सुफैद हो चला था
पर बना था जब तो क्या शान से इतराता था
ऊँची दीवारें , मज़बूत खम्बे , चिकना पलसतर

अब हालात कुछ ऐसे हैं मियां के
झरझराते हैं हल्की सी हवा भी लहलहाए तो

उम्र कम हो तो जवानी का जोश ज्यादा होता है
गुरूर भी कम नहीं होता
सुनते भी नहीं हैं बात किसी की,
ना मानते है बुजुर्गों का कहा

फिर जब अपनी उम्र बढती है तो ज़िन्दगी सिखाती हैं
जो सीख जाये तो अच्छा वर्ना समय की लाठी की मार सिखा देती है

बचपन में कहते हैं बनेंगे बहुत कुछ, और बन भी जाते हैं
मंदिरों में जल चढाते हैं, गुरद्वारों में शीश नवाते हैं
मस्जिद में अल्लाह ढूंढते हैं, गिरिजा में मोम जलाते हैं
इंसान अच्छे बन पाते हैं या सिर्फ बड़े हो जाते हैं ?

Tuesday, 16 October 2012

सफ़र


ख़त्म होता नहीं सफ़र, क्या करूं 

ज़िन्दगी बैठ गयी है थक कर, क्या करूं 

ये शहर जला देता है हौसले सबके 

तन्हाई है चारों पहर , क्या करूं

कहने को तो दोस्त हैं हजारों मेरे

दिल से गले कोई लगता नहीं, क्या करूं

दौलत मिल गयी शोहरत भी कमा ली

वक़्त फ़िर भी गुज़रता नहीं, क्या करूं

किसने कहा था के दिल लगाओ एक ख़्वाब से

जब लग गया तो ये दिल कहीं लगता नहीं, क्या करूं






Sunday, 7 October 2012

Yaad




रात भर नींद से जगाती रही, हवा तेरे घर से होके आती रही...

मेरी दहलीज़ पर देती रही दस्तक, तेरी याद फिर रुलाती रही...

हम मिले थे कब ये याद नहीं... मुझे आज भी पर है याद ये 

नाम लेते थे मेरा  लोग मगर, आवाज़ तेरे नाम की आती रही...

सब्र के मेरे  इम्तिहान ये रब लेता रहा ताउम्र मगर 

ना उसने हार मानी अब तक, और उसकी ज़िद मेरी गुस्ताख़िया बढ़ाती रही 

कहते हैं के इश्क करने वालों की उम्र छोटी होती है...

उस उम्र का करना भी क्या जिसमें, तेरे बगैर सांस बस आती रही, जाती रही 



(In roman)


Raat bhar neend se jagaati rahi, hawaa tere ghar se hoke aati rahi

Meri dehleez par deti rahi dastak, ter yaad phir rulaati rahi

Hum mile the kab ye yaad nahi, mujhe aaj bhi par hai yaad ye

Naam lete the mera log magar, awaaz tere naam kee aati rahi...

Sabr ke mere imtihaan ye rab leta raha ta umr magar

Na usne haar mani ab tak, aur usski zidd meri gustakhiyan badhati rahi

Kehte hain ke ishq karne walon ki umr chhoti hoti hai...

Uss umr ka karna bhi kya jismain, tere bagair saans bas aati rahi jaati rahi